वो तीन महीने
वो तीन महीने
लगभग तीन साल पहले शायद मई का ही महीना था जब मैं उस दिन शाम को मेरे अॉफिस (डायग्नोस्टिक सेन्टर)से अपने रुम(मेरा अपना घरजहाँ कि मालिक सिर्फ मैं थी) लौट रही थी कि कालोनी के गेट पे परी की मम्मी से मिलना हुआ।परी मेरी नन्ही सी दोस्त है जिसके साथ अक्सर शाम को आफिस से आने के बाद कालोनी के चक्कर लगाया करती थी और उस दिन परी की मम्मी कुछ परेशान लग रही थी तो मैं वहीं रूककर उनसे बात करने लगी ।और उनसे पूछा तो पता चला कि उनकी एक दोस्त प्रेगनेंट है और उनकी सास कैन्सर पेशेंट और वो बिस्तर से हिल भी नहीं सकते और कोई ऐसा चाहिए जो उनकी ड्रेसिंग, कैथैटर(पेशाब की नली) और इंजेक्शन लगा दे।पर वो ज्यादा पैसे नहीं खर्च कर सकते तो किसी को उनकी केयर के लिए नहीं रख सकते और अभी उनको यहीं पास में नसियाँ जी में एक कमरा लेके रखा है क्योंकि घर इतना पुराना है और किराये का है तो सीढ़ियाँ चढ़ना सम्भव नहीं है।
तो मैंने पता नहीं क्या सोचा और उनसे कहा कि आप उनको मेरा नम्बर दे दिजिएगा।
और फिर मैं रुम पे आके खाना बनाने लगी कि इतने में ही परी की मम्मी की दोस्त का फोन आया।
उन्होंने बोला मैं नेहा बोल रही हूँ क्या आप अभी मेरे साथ चल सकते हो।
नसियाँ पास ही थी तो मैंनें भी हाँ कर दी और थोड़ी देर में नेहा जी की सास के पास थी।
उन आंन्टी को देखकर मन अंदर ही अंदर कराह रहा था कि हे ईश्वर इतने प्यारे इन्सान के साथ ये तेरी कैसी माया है।
शिकन मेरे माथे पर थी और उनके चेहरे पर थी बस एक निश्छल मुस्कान और शायद उसी मुस्कान ने मुझे बाँध लिया उनके अपनेपन में।
पर अब बात ये थी कि मैं थी तो नर्सिंग स्टूडेंट या यूँ कहूँ तो मेरे पास कोई डिग्री नहीं थी क्योंकि कुछ परिस्थितियों की वजह से मुझे अपना कालेज छोड़ना पड़ा और मैं अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाई पर बात ये थी कि ट्रेनिंग के दौरान हास्पिटल ड्यूटी में जितना सीखा वो हुनर मेरे पास था।
तो मैंनें उनको बताया कि मेरे पास डिग्री तो नहीं है पर वो हुनर है जो हास्पिटल ड्यूटी के दौरान सीखा है।
तो उन आँन्टी ने जो बोला वो बात आज भी कान में गूँजती है उन्होंने कहा था बेटा आज दस दिन हो गए आस पास में जो भी स्टाफ है सबको बोला इजेक्शन लगाने को कोई पैसे इतने बताता है कि दे नहीं सकते और कोई कहता है कि हास्पिटल लेके जाओ पर आज तुम्हें देखकर एक उम्मीद जगी है कि अब ये.दर्द कुछ तो कम होगा।
ये बात से मन में एक हलचल मच गई।वहीं उनसे बातें करते-करते रात के दसबज गए।अगले दिन सुबह सात बजे ही मैं उनके पास थी क्योंकि रात को सामान ना होने की वजह से ड्रेसिंग नहीं कर पाई थी और नो बजे आफिस पहूँचना था तो सुबह सात बजे ही मैं आन्टी के सामने थी।
अब रोज शाम को आफिस से आते वक्त आन्टी से मिलना आदत बन गया था और उनसे बातें करने में उनकी सेवा करने में कब दो महीने बीते पता ही नहीं चला। मैं जब भी उनके पास जाती उनके चेहरे की मुस्कान देखकर सुकून मिलता और उनका कहना बेटा आप इंंजेक्शन लगाती हो तो दर्द का पता ही नहीं चलता।
एक जुलाई उस दिन सुबह से ही बारिश हो रही थी बड़ी मुश्किल से 11बजे बारिश रुकी थी और मुझे अजमेर से बीकानेर जाना था क्योंकि मेरी दोस्त मेड़ता में मेरा इन्तजार कर रही थी तो मुझे जल्दी पहूँचना था पर अचानक से आन्टी को यूरीन में दिक्कत हो गई तो उनके फोन आये पर मैंंनें मना कर दिया पर जैसे ही मैं रुम से बाहर निकली उनकी बहु और आन्टी के पति बाहर खड़े थेतो मैं चाहकर भी उन्हें मना नहीं कर पाई और जाकर देखा तो दर्द के मारे तड़प रहे थे वो फिर जल्दी ही उनके इंंजेक्शन लगाया और फिर कैथेटर बदला तब जाकर उन्हें आराम आया। फिर मैं वहाँ से निकलकर बस स्टैंड आई और बीकानेर पहूँची।
अब आँन्टी ठीक होने लगे थे उनके घाव भी भर चुके थे ।तो उनको अब मेरी जरूरत नहीं थी पर जब वो नसियाँ से घर जा रहे थे तो उन्होंने मुझे कुछ पैसे देने चाहे पर मेरा मन लेने को तैयार नहीं था क्योंकि मैंंनें उनकी मदद पैसों के लिए नहीं उनकी मुस्कान के लिए की थी।
उसके बाद भी महीने में दो बार तो उनसे जाकर मिल ही आती थी।
फिर एक दिन अचानक से उनके घर से फोन आया कि आँन्टी मुझे बुला रहे उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है पर मेरी बदकिस्मती की उस वक्त मेरे पैर में प्लास्टर और कमर में चोट आ रखी थी तो मैं चाहकर भी उनके पास नहीं जा सकती थी। बस यहीं एक कसक रह गई मन में कि काश उस दिन उनके पास जा पाती।
फिर कुछ दिनों बाद पता चला कि वो अब इस दुनियाँ में नहीं रहे।
पर मेरे लिए वो तीन महीने अब तक का सबसे अनमोल वक्त है जब मैं किसी के चेहरे पर मुस्कुराहट की वजह बन पाई।
आज आसमान इतना साफ है कि उसको देख रही थी और एक सितारे में उन
आँन्टी का अक्स नजर आया और वो सारी बातें जो आज यहाँ लिखी हैं सब अनकही है पर आज उस सितारे को देखकर लगा जो स्मृति इस मन में कैद है उसे शब्दों का रुप देकर सहेज लूँ।
खुद खुश हुई तो क्या नया किया हर किसी को खुशियाँ बाँटना चाहती हूँ मैं।
#अनकही_बातें
#सच्ची_बातें
#अजमेर_डायरी
#यादों_के_किस्से
तेरे बिन तेरे संग
राधे कृष्ण
#मीनू©✍️
Love u dear out standing
ReplyDelete💖💖🙏🙏
ReplyDeleteShukriya
Deleteवेरी good बच्चा
ReplyDeleteThank you
Deleteएक ही तो दिल है मीनू और वो भी तुम पिघला देती हो❤
ReplyDeleteIt means alot raavi ji...Thank you
ReplyDeleteMeenu proud of you
ReplyDeleteThank you ❤️
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