खतरा सिर्फ इंसान पर नहीं इंसानियत पर भी

जिंदगी का यह दौर बहुत नाजुक है इतना नाजुक कि जैसे पानी का बुलबुला है हाथ लगाओ उससे पहले ही वह खत्म हो जाए ।

लेकिन फिर भी वह पानी का बुलबुला दोबारा बनता है फिर वही क्रिया चालू रहती है ।

सागर की लहरें किनारे आती है मिट जाती है।लेकिन वो किनारे आना बंद नहीं करती।ठीक उसी तरह लगातार परेशानियों के इस दौर में हम हार मानकर नहीं बैठ सकते हमें लड़ना होगा और जीतना भी होगा ।क्योंकि हम इंसान हैं और इंसानी फितरत में हार कर बैठना हो ही नहीं सकता ।उस ईश्वर ने हमें वो ताकत बक्शी है कि हम हर मुसीबत से लड़ सकते हैं और उस से पार पा सकते हैं ।

मैं अक्सर देखती हूं कि फौज में जब कोई  सैनिक शहीद होता है तो कितना कुछ खत्म हो जाता है उसके पीछे लेकिन उसका परिवार उसकी पत्नी उस शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देते बल्कि जो काम देश के प्रति वो अधूरा छोड़कर गया उसे पूरा करने के लिए वो खुद वर्दी पहन सेना में चली जाती है।

तो बताओ वो भी एक इन्सान ही है ना पर उसे हमसे अलग करती है उसकी जीजीविषा जो उसे लड़ने के लिए तैयार करती  है। वह शहीद की शहादत को बेकार नहीं होना देना चाहती। जब वो जिंदगी के बुरे दौर से लड़कर भी हिम्मत नहीं हारती तो हम क्यों घुटने टेक रहे हैं ।

वो भी इंसान और हम भी इंसान। 

तो जिंदगी का दौर नाजुक है लेकिन हमारी जिजीविषा और हमारी सकारात्मकता,हमारी नैराश्य से लड़ने की ताकत के आगे यह दौर कुछ भी नहीं ।

शर्त इतनी है कि हमें डरकर नहीं डटकर मुकाबला करना होगा।

फिर चाहे कोरोना हो या कोई और दुश्मन।

माना सभीने  अपनों को खोया है पर जो आएगा उसे जाना ही है और किस तरह जाना है। ये हम नहीं नियति तय करती है तो जो हमारे हाथ में नहीं उसके लिए दुःखी होने के बजाय जो हाथ में है उसे संभाला जाए। नियति को  नहीं बदल सकते लेकिन फिर भी हम कुछ तो कर सकते है हम किसी की आर्थिक मदद नहीं कर सकते लेकिन सकारात्मक रहकर किसी की नकारात्मकता को दूर कर सकते हैं।

सच मानिए बुरे से बुरे दौर में किसी का ये कह देना कि मैं हूँ ना इंसान में जीने की उम्मीद जगा सकता है और आपके द्वारा किसी एक भी इन्सान को कहे गए सकारात्मक शब्द कितने गुना होकर लौटेंगे और कितनों की मदद करेंगे ।

आप सोच भी नहीं सकते क्योंकि ये दुनिया गोल है मेरे दोस्त।

तो जब दुनिया गोल है क्यों ना हम हर तकलीफ और परेशानियों को गोल करने में अपनी ऊर्जा खर्च करें ना कि परेशानियों को बढ़ाने में। और ये याद रखना कि हर मुश्किल का हल मिलता है आज नहीं तो कल मिलता है। हम मनुष्यों की सबसे बड़ी ताकत है हमारा आशावादी होना। तो आशावादी बनिए। जितना एक दूसरे को आगाह करना था कर चुके।

क्योंकि ये खतरा सिर्फ इंसान कि जान का ही नहीं इंसानियत को भी खत्म करने वाला है ।इसलिए भावुक नहीं संवेदनशील बनिए ।जितनी हो सके मदद किजिए और नहीं कर सकते तो किसी की तकलीफ को बस सुन लिजिए यकीन मानिए आपका सुनना भी किसीको बहुत गहरे अवसाद से बाहर निकाल सकता है।उसे आत्महत्या जैसा कदम उठाने से रोक सकता है।तो अबसे सिर्फ सकारात्मक सोचिये और सकारात्मकता ही फैलाइए।

हम इंसान है और हमने डर से  मर जाना नहीं सीखा  हमने तो लड़ना सीखा है हमने दुनिया बदल ना सीखा है।  यह प्रकृति का कहर है जिससे हम एक बार हम जीत कर आए लेकिन हां हमारी कुछ लापरवाही  हमारी सरकार की लापरवाही से  हम फिर से उसी दौर में आकर खड़े हो गए जहां से हमने शुरू किया था लेकिन फिर भी जब अगर हम मन में ठान ले तो हमें कौन हरा सकता है वैसे भी कहते हैं कि मान ले तो हार और ठान ले तो जीत है तो हमें ठानना होगा कि हमें कोरोना को हराना है ।

और ये  हमें इसलिए करना है कि हम हमारे देश के भविष्य को बचा सके। और आज को बेहतर बना सके।

हमने बीते वक्त में जो गलतियाँ की उनसे सबक लेकर फिर लड़ना है और ये लड़ाई जीतनी है क्योंकि हार का कोई विकल्प नहीं।

तेरे बिन तेरे संग

राधे कृष्ण

#मीनू©✍️

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