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खतरा सिर्फ इंसान पर नहीं इंसानियत पर भी

जिंदगी का यह दौर बहुत नाजुक है इतना नाजुक कि जैसे पानी का बुलबुला है हाथ लगाओ उससे पहले ही वह खत्म हो जाए । लेकिन फिर भी वह पानी का बुलबुला दोबारा बनता है फिर वही क्रिया चालू रहती है । सागर की लहरें किनारे आती है मिट जाती है।लेकिन वो किनारे आना बंद नहीं करती।ठीक उसी तरह लगातार परेशानियों के इस दौर में हम हार मानकर नहीं बैठ सकते हमें लड़ना होगा और जीतना भी होगा ।क्योंकि हम इंसान हैं और इंसानी फितरत में हार कर बैठना हो ही नहीं सकता ।उस ईश्वर ने हमें वो ताकत बक्शी है कि हम हर मुसीबत से लड़ सकते हैं और उस से पार पा सकते हैं । मैं अक्सर देखती हूं कि फौज में जब कोई  सैनिक शहीद होता है तो कितना कुछ खत्म हो जाता है उसके पीछे लेकिन उसका परिवार उसकी पत्नी उस शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देते बल्कि जो काम देश के प्रति वो अधूरा छोड़कर गया उसे पूरा करने के लिए वो खुद वर्दी पहन सेना में चली जाती है। तो बताओ वो भी एक इन्सान ही है ना पर उसे हमसे अलग करती है उसकी जीजीविषा जो उसे लड़ने के लिए तैयार करती  है। वह शहीद की शहादत को बेकार नहीं होना देना चाहती। जब वो जिंदगी के बुरे दौर से लड़कर भी हिम्मत ...