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हमसफर

 किसी ने पूछा था कि तू शादी कब करेगी मैंने कहा कभी नहीं  फिर उसने पूछा कि फिर भी बता तो दे कैसा जीवन साथी चाहिए... मैं जिस वक्त ये सवाल पूछा गया था तब कुछ सोचा नहीं था पर उसने कई बार ये सवाल पूछा तो लगा आज जवाब दे ही देती हूँ.. ..। तो शादी के बाद पति नहीं हमसफर चाहिए जो दोस्त ज्यादा हो...  कभी कोई फैसला करूँ तो वो ये ना कहे कि तुम गलत हो  बस इतना बता दे कि ये गलत ये सही पर फैसला  मैं ही लूँ बिना किसी दबाव के और जो गलत हो जाऊँ तो  वो ये ना कहे कि मैंनें तो पहले ही कहा था कि तुम गलत हो इसके बजाय वो बस खामोशी से हाथ थामकर गले लगाकर कह दे कि कोई ना जो होगा देख लेगें तुम बस अपने आत्मविश्वास के साथ खड़ी रहो.. वो हर बात पर ये ना कहे कि यहाँ नहीं जाना वहाँ नहीं जाना, और कहे कि हर बात के लिए इजाजत लेनी पड़ेगी बल्कि वो ये कहे कि जीवन तुम्हारा है तो तुम तय करो.... बाकी मैं तो हर बात में साथ हूँ पर इसका मतलब ये नहीं कि तुम सहारे की तलाश में रहो..... गर कभी बकबक मशीन की तरह बोलती रहूँ तो ये ना कहे कि चुप रहा करो.... बल्कि ये कहे कि खामोश अच्छी नहीं लगती.... कभी जो चुप हो ...

खतरा सिर्फ इंसान पर नहीं इंसानियत पर भी

जिंदगी का यह दौर बहुत नाजुक है इतना नाजुक कि जैसे पानी का बुलबुला है हाथ लगाओ उससे पहले ही वह खत्म हो जाए । लेकिन फिर भी वह पानी का बुलबुला दोबारा बनता है फिर वही क्रिया चालू रहती है । सागर की लहरें किनारे आती है मिट जाती है।लेकिन वो किनारे आना बंद नहीं करती।ठीक उसी तरह लगातार परेशानियों के इस दौर में हम हार मानकर नहीं बैठ सकते हमें लड़ना होगा और जीतना भी होगा ।क्योंकि हम इंसान हैं और इंसानी फितरत में हार कर बैठना हो ही नहीं सकता ।उस ईश्वर ने हमें वो ताकत बक्शी है कि हम हर मुसीबत से लड़ सकते हैं और उस से पार पा सकते हैं । मैं अक्सर देखती हूं कि फौज में जब कोई  सैनिक शहीद होता है तो कितना कुछ खत्म हो जाता है उसके पीछे लेकिन उसका परिवार उसकी पत्नी उस शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देते बल्कि जो काम देश के प्रति वो अधूरा छोड़कर गया उसे पूरा करने के लिए वो खुद वर्दी पहन सेना में चली जाती है। तो बताओ वो भी एक इन्सान ही है ना पर उसे हमसे अलग करती है उसकी जीजीविषा जो उसे लड़ने के लिए तैयार करती  है। वह शहीद की शहादत को बेकार नहीं होना देना चाहती। जब वो जिंदगी के बुरे दौर से लड़कर भी हिम्मत ...

खत गुमनाम सा

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गुमनाम दोस्त के नाम मुझे नहीं पता ये खत मैं किस के लिए लिख रही हूँ बस लिख रही हूँ शायद मन में जो सवाल है कहीं दूर चले जाए जो डर है वो फुर हो जाए। वैसे तो लोगों को उसको देखकर लगता होगा कि वो कितनी एक्सट्रोवर्ट है हो भी सकता है उनकी नजर में होगी। पर सच कहूँ तो वो अपने मन की बात भी खुल कर कह नहीं पाती और कोई कुछ कह दे और जो रो दे तो लोग सोचते है कि नाटक होगा।पर रोना नाटक तो नहीं मन को भी चोट लगती है वो भी तड़पता है और बस वहीं घाव आँसुओं में बहकर भरना चाहते होंगे। वैसे तो कोई शिकायत नहीं तुमको किसी से पर सारे इल्जाम खुद पर डाल देती हो और फिर तलाशती हो सिर्फ अपनी गलतियाँ और ना मिले तो फिर चुप हो जाती हो ठीक वैसे ही जैसे अंधेरी रात का सन्नाटा। पर तुम कब तक ऐसी बनी रहोगी बिना गलतियों के सजा भुगतती रहोगी। हाँ तुम सोच रही होगी कि क्या बोल रही हूँ तुमको पर देखो तुम्हारी खिलखिलाहट के साथ हवा गाती है पंछी चहचहाते है बारिशें आती है और तुम हो कि यूँ उदास हो। हाँ उदासी है माना , उदासी के हजार कारण है पर तेरे हँसने को एक बहाना काफी है।और जब भी मन करे मेरा ये खत पढ़ना और खुद की तलाश में निकल पड़ना ज...

औरत

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 जब बैठे हो राजा बन धृतराष्ट्र दरबार में चीर खींचते दिख जाते दुशासन दरबार में गांधारी जब पाप देखकर अंधी हो जाती है तभी फेंकते मामा शकुनि पासे दरबार में झूठी  चालों में जब धर्मराज फँस जाते है तब दुर्योधन ठहाके लगा हँसते दरबार में जब अपमान हुआ कुलवधू द्रोपदी का कुरूवंश का अंत दिखा उसी वक्त दरबार में मौन खड़े थे भीष्म पितामह साधी चुप्पी द्रोण ने गुहार लगाकर घूम रही पांचाली दरबार में पाडंव रक्षा कर न सके नजर झुकाए बैठे थे तब आकर मधूसूदन ने लाज बचाई दरबार में उस वक्त एक दुशासन और दुर्योधन था अब हर घर में मिल जाते हैं काम वासना के भूखे  ये औरत का जिस्म नोंच खाते है अब कृष्ण कहाँ आ पाते लाज बचाने को या तो खुद मर जाती है या मार दी जाती  अब कहाँ बच पाती द्रौपदी इन हैवानों से अब डरकर जीवन जीने से क्या होगा बनकर योद्धा खुद को ही महाभारत लड़ना होगा अब अर्जुन और माधव से नहीं खुद थाम लगाम रथ की हाथों में शस्त्र धरना होगा। तेरे बिन तेरे संग राधे कृष्ण #मीनू©✍️

कुछ यादें

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 2010 परीक्षा देकर छुट्टियों में मासी के यहाँ गई थी तब उनका  हरीद्वार जाने का कार्यक्रम बना और मैं भी वहाँ थी तो मुझे भी साथ ले गए।  मासूम मन था तो खुशी भी थी कि पहली बार किसी दूसरे राज्य में जाने का मौका मिल रहा था तो मैंनें भी मना नहीं किया।और मासूम मन जिसे घूमने का बहुत शौक है उसने यूँ तो कभी घर से बाहर की दुनिया देखी ना थी पर बचपन से अपनी कल्पनाओं में देश विदेश घूम लिया था। और जब किसी को बताती थी बचपन में तो सब हँसते थे कि पागल लड़की है  जो ऐसी बातें करती है और उस वक्त तक तो मोबाईल फोन या किताबें भी नहीं पढ़ी थी कि अपनी बात को सच साबित कर पाऊँ।पर सच ये है कि जब भी बालों की चोटी बनवाती थी जाने कहाँ कहाँ घूम आती थी।तो हरिद्वार और ऋषिकेश जाने का जब ये कार्यक्रम बना मैंनें बताया मासी को कौनसी जगह कहाँ पर होगी और जब वहाँ पहूँची तो सब हूबहू वैसा ही था जैसा मैंनें अपनी कल्पनाओं में देखा था। मेड़ता सिटी से मेड़ता रोड़ पहूँचकर कालका एक्सप्रेस के जनरल डब्बे में बैठकर यात्रा शुरू हुई ।और ट्रेन खाली थी तो मुझे अपनी पसंद की सीट मिल गई खिड़की के पास और रास्ते भर उस खिड़की पर सिर टिका...

मेरी टीचर

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डॉक्टर ब्लासम प्रिया पीटर्स यहीं नाम था मेरी माइक्रोबायोलॉजी की टीचर का जो कालेज में सबकी फेवरिट थी और मेरी भी फेवरिट थी मैम आप..  पर मेरे लिए स्पेशल बात ये थी कि मैं आपकी फेवरिट थी।  और ये उस दिन पता चला जब आप मेरे बर्थडे वाले दिन मुझे कालेज कैम्पस और हास्पिटल में ढूढ़ रहे थे। और आखिरी में मैं  मिली आपको हास्पिटल पार्किंग में । और कैसे आपने मुझे देखते ही आवाज दी थी ना मीना इधर आना और जब मैं आपके पास पहूँची तो आपका गले से लगा लेना आज भी याद आता है जैसे उस शहर की भीड़ मेेंं कोई अपना मिल गया जो मेरी आँखे पढ़ लेती थी जो मेरे डर को मेरी ताकत बनाने की बात करती थी।और फिर आपका वो प्यारा सा कीचैन और वो फाइवस्टार चाकलेट देना और कहना हैप्पी बर्थडे बच्चा और बोलना की क्लास खत्म करके मेरे पास आना। और उस दिन जब मैं आपके पास आई मेडिकल कालेज में तो आपका एक बार फिर से गले से लगाना और यीशु से मेरे लिए प्रार्थना करना सब मेरे लिए अचानक हुआ था।शायद इतना प्यार और अपनापन कभी देखा नहीं था तो आश्चर्यचकित थी। फिर तो जब भी परेशान होती थी बस आप ही दिखते थे जिनके पास जाकर कुछ कहना ही नहीं पड़ता थ...

पायल:सपनों भरी निगाहें

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पायल:सपनों भरी निगाहें 2017 दिसम्बर की बात है जब किरन की पाठशाला गई थी,उस वक्त मन बहुत परेशान था पर किरन ने बुलाया था तो चली गई। और वहीं मुलाकात हुई उन मासूमों से । प्यारे और मासूम बच्चे थे जिनकी हँसी और मुस्कुराहट में आप सारा दर्द भूल जाओ। उस दिन लगभग पूरा दिन वहीं बिताया था उन बच्चों के साथ और किरन और उसके परीवार के साथ उस दिन किरन के साथ ही वहाँ कई और अच्छे लोगों से मुलाकात हुई। जिनमें से कई लोग आज भी सम्पर्क में है। तो बात ये है कि किरन से जितनी बात नहीं हुई उस दिन उससे कई ज्यादा बात हुई उस पाठशाला में पढने वाले बच्चों से ...... बच्चों ने मुझसे काफी बातें की किसी ने गाना किसी ने कविता और किसी ने डांस और हाँ वहाँ बच्चों की बनाई ड्राईंग भी देखने को मिली। अब आती हूँ पायल पे पायल उन्हीं बच्चों में थोड़ी समझदार आठवीं कक्षा में पढने वाली लड़की थी।जब सब बच्चे बात कर रहे थे वो चुपचाप बैठी थी। पायल साँवले रंग और बड़ी बड़ी काली भूरी आँखों वाली लड़की थी।जब मैंनें उसे देखा तो उसके लब भले खामोश हो पर उसकी आँखें बात कर रही थी। उन आँखों में अनगिनत सपने भरे थे।फिर जब मैंनें उससे बात की तब उसन...