Posts

Showing posts from May, 2020

पायल:सपनों भरी निगाहें

Image
पायल:सपनों भरी निगाहें 2017 दिसम्बर की बात है जब किरन की पाठशाला गई थी,उस वक्त मन बहुत परेशान था पर किरन ने बुलाया था तो चली गई। और वहीं मुलाकात हुई उन मासूमों से । प्यारे और मासूम बच्चे थे जिनकी हँसी और मुस्कुराहट में आप सारा दर्द भूल जाओ। उस दिन लगभग पूरा दिन वहीं बिताया था उन बच्चों के साथ और किरन और उसके परीवार के साथ उस दिन किरन के साथ ही वहाँ कई और अच्छे लोगों से मुलाकात हुई। जिनमें से कई लोग आज भी सम्पर्क में है। तो बात ये है कि किरन से जितनी बात नहीं हुई उस दिन उससे कई ज्यादा बात हुई उस पाठशाला में पढने वाले बच्चों से ...... बच्चों ने मुझसे काफी बातें की किसी ने गाना किसी ने कविता और किसी ने डांस और हाँ वहाँ बच्चों की बनाई ड्राईंग भी देखने को मिली। अब आती हूँ पायल पे पायल उन्हीं बच्चों में थोड़ी समझदार आठवीं कक्षा में पढने वाली लड़की थी।जब सब बच्चे बात कर रहे थे वो चुपचाप बैठी थी। पायल साँवले रंग और बड़ी बड़ी काली भूरी आँखों वाली लड़की थी।जब मैंनें उसे देखा तो उसके लब भले खामोश हो पर उसकी आँखें बात कर रही थी। उन आँखों में अनगिनत सपने भरे थे।फिर जब मैंनें उससे बात की तब उसन...

वो मासूम दोस्त

Image
इनकी याद आती है पूरे चार महीने हो गए इनसे मिले हुए। जब वो शहर छूटा तो उसके साथ ही ये नन्हें दोस्त भी बिछड़ गए।  जाने किस हाल में होगें अब ये इन हालातों में काश इन्हें कोई मदद करने वाला जरूर मिले।  लाइब्रेरी के बाहर इनसे लगभग रोज मुलाकात होती थी ।  और इनकी मासूमियत इतनी की किसी को तंग नहीं करते बस दिनभर वहीं कोने में बैठे रहते ।और मैं दिख जाती तो मुझसे कितने सवाल करते और हमेशा यहीं बोला करते दीदी आप हमारे लिए भी पेन्सिल और कापी ला दो ना । हमें भी पढ़ना सीखना है बस यहीं बात थी कि ये मासूम मेरे दोस्त बन गए।  और फिर तो जब कभी में खाना बनाकर ले जाती तो इनके साथ शेयर जरूर होता। सच ये छोटी छोटी बातें मेरे जीवन में बहुत बड़ी है। और कापी में पेन्सिल से अपना लिखा ऐसे दिखाते जैसे मैं इनकी टीचर हूँ। ये तस्वीर जबकि है जब पहली बार इन्हें देखा था और इन्हें बिना बताए ये तस्वीर ली थी । और जब ये मासूम इस झल्ली के दोस्त बन गए तो इनकी बातों में इतना खो जाती कि तस्वीर लेना याद ही नहीं रहा।बस ईश्वर से प्रार्थना है कि ये मासूम जहाँ भी हो स्वस्थ्य और मस्त हो।। #अजमेर_डायरी तेरे...

मजदूर ,मजबूर,पलायन और जिन्दगी

Image
मजदूर ,मजबूर,पलायन और जिन्दगी देखने में सबको तरस आ रहा है कि ये सब अपने गाँव पहूँच जाए पर क्या गाँव पहुँचकर इनकी समस्याएँ और तकलीफ कम हो जाएगी क्या इन्हें वहाँ दो वक्त की रोटी और जरूरी आवश्यकताएँ जो जीने के लिए जरूरी है रोटी,कपड़ा और मकान क्या वो सब मिल पाएगा। कागजों में तो इनकी सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी पर क्या हकीकत में ये लोग एक सामान्य जीवन जी पाएंगे। गाँव में ही अगर इनका जीवन आसान होता तो ये अपने गाँव को छोड़कर यूँ दूर देश ना जाते और जब ये वहाँ दो पैसे कमाकर अपना जीवनयापन कर रहे थे तो अचानक से ये सब हो गया ।इनके बच्चे जो किसी सरकारी स्कूल में पढ़ रहे थे और जो नहीं पढ़ रहे थे सबका भविष्य अधर में है पर नेता राजनीति कर रहे और हम लोग सांत्वना। पर इनके पलायन को रोककर ये जहाँ थे इनको वहीं रहने दिया जाता इनकी नौकरियों पर खतरा नहीं मंडराता। तो ये लोग यूँ सैकड़ों किलोमीटर तक पैदल चलने को विवश नहीं होते । और हाँ इनके साथ सिर्फ ये नहीं इनकी पत्नी और बच्चे भी है और कुछ औरतें पेट से होगी और कुछ महीने के उन कठिन दिनों में होगी। जिसके असहनीय दर्द की हम कल्पना नहीं कर सकते। और क्या उनके पास ...

वो तीन महीने

         वो तीन महीने लगभग तीन साल पहले शायद मई का ही महीना था जब मैं उस दिन शाम को मेरे अॉफिस (डायग्नोस्टिक सेन्टर)से अपने रुम(मेरा अपना घरजहाँ कि मालिक सिर्फ मैं थी) लौट रही थी कि कालोनी के गेट पे परी की मम्मी से मिलना हुआ।परी मेरी नन्ही सी दोस्त है जिसके साथ अक्सर शाम को आफिस से आने के बाद कालोनी के चक्कर लगाया करती थी और उस दिन परी की मम्मी कुछ परेशान लग रही थी तो मैं वहीं रूककर उनसे बात करने लगी ।और उनसे पूछा तो पता चला कि उनकी एक दोस्त प्रेगनेंट है और उनकी सास कैन्सर पेशेंट और वो बिस्तर से हिल भी नहीं सकते और कोई ऐसा चाहिए जो उनकी ड्रेसिंग, कैथैटर(पेशाब की नली) और इंजेक्शन लगा दे।पर वो ज्यादा पैसे नहीं खर्च कर सकते तो किसी को उनकी केयर के लिए नहीं रख सकते और अभी उनको यहीं पास में नसियाँ जी में एक कमरा लेके रखा है क्योंकि घर इतना पुराना है और किराये का है तो सीढ़ियाँ चढ़ना सम्भव नहीं है। तो मैंने पता नहीं क्या सोचा और उनसे कहा कि आप उनको मेरा नम्बर दे दिजिएगा। और फिर मैं रुम पे आके खाना बनाने लगी कि इतने में ही परी की मम्मी की दोस्त का फोन आया। उन्हो...