औरत


 जब बैठे हो राजा बन धृतराष्ट्र दरबार में

चीर खींचते दिख जाते दुशासन दरबार में

गांधारी जब पाप देखकर अंधी हो जाती है

तभी फेंकते मामा शकुनि पासे दरबार में

झूठी  चालों में जब धर्मराज फँस जाते है

तब दुर्योधन ठहाके लगा हँसते दरबार में

जब अपमान हुआ कुलवधू द्रोपदी का

कुरूवंश का अंत दिखा उसी वक्त दरबार में

मौन खड़े थे भीष्म पितामह साधी चुप्पी द्रोण ने

गुहार लगाकर घूम रही पांचाली दरबार में

पाडंव रक्षा कर न सके नजर झुकाए बैठे थे

तब आकर मधूसूदन ने लाज बचाई दरबार में

उस वक्त एक दुशासन और दुर्योधन था

अब हर घर में मिल जाते हैं

काम वासना के भूखे 

ये औरत का जिस्म नोंच खाते है

अब कृष्ण कहाँ आ पाते लाज बचाने को

या तो खुद मर जाती है या मार दी जाती 

अब कहाँ बच पाती द्रौपदी इन हैवानों से

अब डरकर जीवन जीने से क्या होगा

बनकर योद्धा खुद को ही महाभारत लड़ना होगा

अब अर्जुन और माधव से नहीं

खुद थाम लगाम रथ की हाथों में शस्त्र धरना होगा।

तेरे बिन तेरे संग

राधे कृष्ण

#मीनू©✍️

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