जिंदगी का यह दौर बहुत नाजुक है इतना नाजुक कि जैसे पानी का बुलबुला है हाथ लगाओ उससे पहले ही वह खत्म हो जाए । लेकिन फिर भी वह पानी का बुलबुला दोबारा बनता है फिर वही क्रिया चालू रहती है । सागर की लहरें किनारे आती है मिट जाती है।लेकिन वो किनारे आना बंद नहीं करती।ठीक उसी तरह लगातार परेशानियों के इस दौर में हम हार मानकर नहीं बैठ सकते हमें लड़ना होगा और जीतना भी होगा ।क्योंकि हम इंसान हैं और इंसानी फितरत में हार कर बैठना हो ही नहीं सकता ।उस ईश्वर ने हमें वो ताकत बक्शी है कि हम हर मुसीबत से लड़ सकते हैं और उस से पार पा सकते हैं । मैं अक्सर देखती हूं कि फौज में जब कोई सैनिक शहीद होता है तो कितना कुछ खत्म हो जाता है उसके पीछे लेकिन उसका परिवार उसकी पत्नी उस शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देते बल्कि जो काम देश के प्रति वो अधूरा छोड़कर गया उसे पूरा करने के लिए वो खुद वर्दी पहन सेना में चली जाती है। तो बताओ वो भी एक इन्सान ही है ना पर उसे हमसे अलग करती है उसकी जीजीविषा जो उसे लड़ने के लिए तैयार करती है। वह शहीद की शहादत को बेकार नहीं होना देना चाहती। जब वो जिंदगी के बुरे दौर से लड़कर भी हिम्मत ...
डॉक्टर ब्लासम प्रिया पीटर्स यहीं नाम था मेरी माइक्रोबायोलॉजी की टीचर का जो कालेज में सबकी फेवरिट थी और मेरी भी फेवरिट थी मैम आप.. पर मेरे लिए स्पेशल बात ये थी कि मैं आपकी फेवरिट थी। और ये उस दिन पता चला जब आप मेरे बर्थडे वाले दिन मुझे कालेज कैम्पस और हास्पिटल में ढूढ़ रहे थे। और आखिरी में मैं मिली आपको हास्पिटल पार्किंग में । और कैसे आपने मुझे देखते ही आवाज दी थी ना मीना इधर आना और जब मैं आपके पास पहूँची तो आपका गले से लगा लेना आज भी याद आता है जैसे उस शहर की भीड़ मेेंं कोई अपना मिल गया जो मेरी आँखे पढ़ लेती थी जो मेरे डर को मेरी ताकत बनाने की बात करती थी।और फिर आपका वो प्यारा सा कीचैन और वो फाइवस्टार चाकलेट देना और कहना हैप्पी बर्थडे बच्चा और बोलना की क्लास खत्म करके मेरे पास आना। और उस दिन जब मैं आपके पास आई मेडिकल कालेज में तो आपका एक बार फिर से गले से लगाना और यीशु से मेरे लिए प्रार्थना करना सब मेरे लिए अचानक हुआ था।शायद इतना प्यार और अपनापन कभी देखा नहीं था तो आश्चर्यचकित थी। फिर तो जब भी परेशान होती थी बस आप ही दिखते थे जिनके पास जाकर कुछ कहना ही नहीं पड़ता थ...
किसी ने पूछा था कि तू शादी कब करेगी मैंने कहा कभी नहीं फिर उसने पूछा कि फिर भी बता तो दे कैसा जीवन साथी चाहिए... मैं जिस वक्त ये सवाल पूछा गया था तब कुछ सोचा नहीं था पर उसने कई बार ये सवाल पूछा तो लगा आज जवाब दे ही देती हूँ.. ..। तो शादी के बाद पति नहीं हमसफर चाहिए जो दोस्त ज्यादा हो... कभी कोई फैसला करूँ तो वो ये ना कहे कि तुम गलत हो बस इतना बता दे कि ये गलत ये सही पर फैसला मैं ही लूँ बिना किसी दबाव के और जो गलत हो जाऊँ तो वो ये ना कहे कि मैंनें तो पहले ही कहा था कि तुम गलत हो इसके बजाय वो बस खामोशी से हाथ थामकर गले लगाकर कह दे कि कोई ना जो होगा देख लेगें तुम बस अपने आत्मविश्वास के साथ खड़ी रहो.. वो हर बात पर ये ना कहे कि यहाँ नहीं जाना वहाँ नहीं जाना, और कहे कि हर बात के लिए इजाजत लेनी पड़ेगी बल्कि वो ये कहे कि जीवन तुम्हारा है तो तुम तय करो.... बाकी मैं तो हर बात में साथ हूँ पर इसका मतलब ये नहीं कि तुम सहारे की तलाश में रहो..... गर कभी बकबक मशीन की तरह बोलती रहूँ तो ये ना कहे कि चुप रहा करो.... बल्कि ये कहे कि खामोश अच्छी नहीं लगती.... कभी जो चुप हो ...
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